भाग १ (Part 1)
सूरज ढलते हुए गांव की पुरानी गलियों पर सुनहरी रोशनी बिखेर रहा था। बैंगलोर से छुट्टियों में आई २२ साल की लक्ष्मी बस से उतरी। उसकी पतली कमर, ऊपर उठे गोल-गोल स्तन, नाजुक कूल्हे और गोरी-चिकनी त्वचा हल्की नीली सूती साड़ी में बेहद मोहक लग रही थी। पल्लू कंधे पर लहराते हुए वह घर की ओर बढ़ी। हवा में आम के बागों की महक और मिट्टी की गंध घुली हुई थी।
तभी पड़ोस वाली प्रिया दिख गई। ३५ साल की प्रिया गांव की सबसे रसीली औरत थी। भारी-भरकम दूध जैसे स्तन, चौड़ी कमर, मोटी-मोटी जांघें, गहरा गेहुंआ रंग, लंबे काले बाल और मोटे होंठ। लेकिन उसकी आंखों में सालों की उपेक्षा की उदासी छाई हुई थी। पति शहर में नौकरी करता था, महीनों-महीनों घर नहीं आता। फोन भी कम आता था।
“अरे लक्ष्मी बेटी! आ गईं तुम?” प्रिया ने खुशी से आगे बढ़कर उसे जोर से गले लगा लिया। उसके भारी, नरम, गरम स्तन लक्ष्मी की छाती से पूरी ताकत से रगड़ खा गए। लक्ष्मी ने जानबूझकर गले लगाए रखा, थोड़ा और दबाव डाला। वाह… आंटी के ये स्तन कितने मुलायम और भारी हैं… कितनी गर्मी है इनमें, लक्ष्मी के मन में विचार आया।
“आंटी, आप तो पिछले साल से भी ज्यादा खूबसूरत और रसीली हो गई हैं। लेकिन चेहरा थका-थका सा है। क्या बात है? पति की याद सता रही है क्या?” लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए पूछा, अपनी आवाज में मिठास और इशारा घोलकर।
प्रिया ने लंबी आह भरी। “अंदर चलो बेटी। बाहर बहुत गर्मी है। पंखे के नीचे बैठकर बात करते हैं।”
दोनों प्रिया के घर में घुसीं। पुराना पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था। फर्श पर चटाई बिछाकर दोनों बैठ गईं। प्रिया ने दो नारियल पानी निकाले। बातें शुरू हुईं। लक्ष्मी ने बैंगलोर के कॉलेज, पढ़ाई, लड़कों की चीजें बताईं। प्रिया हर बार अपने पति की शिकायत पर आ जाती।
“हफ्ते में बस एक फोन। कहता है मेहनत कर रहा हूँ, पैसे भेज रहा हूँ। लेकिन लक्ष्मी बेटी, औरत की क्या जरूरतें होती हैं? सिर्फ पैसे से तो शरीर की आग नहीं बुझती। गर्मजोशी चाहिए, छूना चाहिए, प्यार चाहिए, चुदाई चाहिए…” प्रिया की आवाज भारी और भरी हुई थी। उसकी नजर बार-बार लक्ष्मी के होंठों और उभरे स्तनों पर जा रही थी।
लक्ष्मी के पेट के नीचे गर्म लहर दौड़ गई। उसने अपना घुटना प्रिया की मोटी, नरम जांघ से सटा दिया। “आंटी, पति का इंतजार क्यों करती हो? तुम अभी भी जवान हो, बहुत रसीली हो, बहुत भारी-भरकम हो। ऐसी औरत को सूखने नहीं देना चाहिए। समय बर्बाद मत करो।”
प्रिया के गाल लाल हो गए। उसने पल्लू ठीक किया लेकिन स्तनों की गहरी खाई और भी साफ दिखने लगी। “क्या कह रही हो बेटी? मैं दूसरों के पास कैसे जा सकती हूँ? गांव में इज्जत का क्या होगा? लोग क्या कहेंगे?”
लक्ष्मी ने और पास खिसककर प्रिया की जांघ पर हाथ रख दिया। “किसने कहा पुरुषों के पास जाने को? पुरुष तो बस झंझट हैं आंटी। और भी तरीके हैं… जो इज्जत नहीं छीनते, जो और ज्यादा मजे देते हैं, जो औरत को औरत ही समझती है।” उसकी उंगलियां साड़ी की किनारी पर फिसलती हुई प्रिया की जांघ को सहलाने लगीं।
प्रिया सिहर गई। “लक्ष्मी… ऐसी बातें मत करो। मैं तुम्हारी आंटी हूँ, उम्र में बड़ी हूँ। ये गलत है।” लेकिन उसकी सांसें तेज हो गईं। ब्लाउज के नीचे निप्पल सख्त होकर उभर आए थे।
लक्ष्मी ने फुसफुसाते हुए कहा, “स्कूल के दिनों का बॉयफ्रेंड याद कीजिए ना आंटी। वो लड़का जो शाम को तमरिंद के पेड़ के पीछे ले जाता था, चुम्बन चुराता था, स्तनों को दबाता था। याद है कैसे तुम्हारी चूत गीली हो जाती थी? शरीर में सनसनी दौड़ जाती थी? उस उत्तेजना को फिर महसूस करना चाहती हो? बिल्कुल सुरक्षित, बिना किसी पुरुष के, सिर्फ मेरे साथ।”
प्रिया की सांस रुक गई। “नहीं लक्ष्मी… बंद करो ये सब। मैंने कभी सोचा भी नहीं।” लेकिन उसकी जांघें थोड़ी-थोड़ी फैलने लगीं।
लक्ष्मी ने हिम्मत बढ़ाई। “गलत नहीं आंटी, बहुत जरूरी है। देखो तुम्हारी सांसें कितनी तेज हो गई हैं। चेहरा लाल, होंठ सूख गए हैं। तुम्हारा शरीर तो चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि छूओ मुझे।”
लगभग एक घंटे तक बातें चलती रहीं। प्रिया ने अपनी सारी तकलीफ बताई – पति की उपेक्षा, रातों की जलन, अकेलेपन की पीड़ा। लक्ष्मी हर बात का जवाब कामुक इशारों से देती रही।
“रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर जब अपनी चूत छूती हो, उंगलियां अंदर डालती हो तो क्या महसूस होता है आंटी?” लक्ष्मी ने पूछा, उसकी उंगलियां अब प्रिया की साड़ी के अंदर जांघ की नरम त्वचा पर घूम रही थीं। “कल्पना करो मेरी उंगलियां हैं… लंबी, पतली, जानती हुई… धीरे-धीरे अंदर घुसती हुईं, ठीक उस जगह को सहलाती हुईं जहां सबसे ज्यादा प्यास लगती है।”
प्रिया का प्रतिरोध आखिरकार टूट गया। “ये पागलपन है लक्ष्मी… लेकिन भगवान जानते हैं मैं कितनी प्यासी हूँ। कितनी सालों से सूखी पड़ी हूँ।”
लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए प्रिया की साड़ी और पेटीकोट को जांघों तक ऊपर सरका दिया। मोटी-मोटी चिकनी जांघें और बिना पैंटी वाली, पूरी भीगी, सूजी हुई चूत सामने थी। “आंटी, तुम तो बिना पैंटी के घूम रही हो? कितना रस बह रहा है… कितनी गर्मी है।”
“आह्ह्ह… लक्ष्मी…” प्रिया की लंबी आह निकली जब लक्ष्मी की दो उंगलियां सीधे उसकी गर्म, चिपचिपी चूत में घुस गईं। साड़ी अभी भी आधी लिपटी हुई थी। लक्ष्मी ने उंगलियां तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। अंगूठा क्लिट पर गोल-गोल घुमाते हुए जोर से दबा रही थी।
छ्लिक्… छ्लिक्… छ्लिक्… पूरी कमरे में भीगी आवाजें गूंज रही थीं।
“स्कूल वाले बॉयफ्रेंड की याद करो आंटी… वो जो तुम्हें पेड़ के पीछे दबाकर चोदना चाहता था। लेकिन मैं उससे कहीं बेहतर हूँ। मैं जानती हूँ औरत की चूत को कैसे पागल बनाना है।” लक्ष्मी ने प्रिया की गर्दन चूम ली, काटा, चूसा।
प्रिया की कमर खुद-ब-खुद ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने मना किया था… बार-बार मना किया था… लेकिन ये उंगलियां जादू कर रही हैं। मेरी चूत इतनी सालों बाद जीवित हो गई है, उसके मन में विचार दौड़ रहे थे।
पहला ऑर्गेज्म बहुत जोरदार आया। प्रिया की चूत ने लक्ष्मी की उंगलियों को कसकर पकड़ लिया। गर्म-गर्म रस उंगलियों पर, हाथ पर और साड़ी पर बह निकला। “हाय भगवान!… मैं आ गई… बहुत जोर से आ गई!!” प्रिया चीख पड़ी, पूरा शरीर झड़झड़ा उठा।
भाग २
लेकिन लक्ष्मी ने उंगलियां नहीं निकालीं। वह प्रिया की चूत के अंदर ही उंगलियां हिलाती रही, धीमी और गहरी गति से। “आंटी, अभी तो शुरुआत हुई है। तुम्हारी चूत तो अभी भी भूखी है। देखो कितना रस निकला… मेरी पूरी उंगलियां चिपचिपी हो गई हैं।”
प्रिया हांफ रही थी, आंखें बंद किए, शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था। भगवान, मैंने मना किया था… लेकिन ये लड़की मेरी चूत को पागल बना रही है। पति ने कभी इतना रस नहीं निकाला, उसके मन में शर्म और मजा दोनों घुल रहे थे।
लक्ष्मी ने प्रिया की साड़ी का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। ब्लाउज के सारे हुक एक-एक करके तोड़े। दो भारी, लटकते, बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। काले, मोटे निप्पल पहले से ही खड़े थे। लक्ष्मी ने एक स्तन दोनों हाथों में उठाया, मसलने लगी और मुंह लगा दिया। जोर-जोर से चूसने लगी, जीभ से निप्पल को घुमाती हुई।
“आह्ह्ह… लक्ष्मी… धीरे… बहुत जोर से चूस रही हो…” प्रिया कराह उठी। लेकिन उसका एक हाथ लक्ष्मी के सिर पर था, उसे और जोर से दबा रहा था।
लक्ष्मी ने दूसरा स्तन भी हाथ से मसलना शुरू कर दिया। “आंटी के ये बोब्स कितने बड़े और मुलायम हैं। पति इनको छूता भी होगा या बस शहर में दूसरी औरतों को चोदता होगा?” उसने व्यंग्य भरे स्वर में कहा।
प्रिया ने शर्म से आंखें बंद कर लीं। “बंद करो… लेकिन… मत छोड़ो… चूसती रहो।”
लक्ष्मी ने अपनी साड़ी भी उतार फेंकी। अब वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसकी चुस्त, युवा देह प्रिया के सामने थी – छोटे-मोटे सख्त स्तन, पतली कमर, साफ चूत। उसने प्रिया का हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया।
“आंटी, मुझे भी छुओ। देखो तुमने मुझे कितनी गीली कर दिया है। मेरी चूत से रस टपक रहा है।”
प्रिया ने पहली बार हिचकिचाते हुए लक्ष्मी की चूत को छुआ। उंगलियां भीगी फुद्दी पर फिसलीं। “बहुत गर्म है… और चिकनी…” उसने धीरे-धीरे उंगली अंदर डालनी शुरू कर दी।
दोनों एक-दूसरे की चूत में उंगलियां डालकर झूमने लगीं। कमरा उनकी हांफती सांसों और भीगी आवाजों से भर गया था – छ्लिक्… छ्लिक्… छ्लिक्…
“आंटी, तुम्हारे खेत बहुत उपजाऊ हैं। मैं इनको रोज सिंचाई करूंगी,” लक्ष्मी ने हांफते हुए कहा।
प्रिया अब पूरी तरह झुक चुकी थी। “शैतान… तू मुझे क्या कर रही है… मेरी चूत जल रही है… और उंगलियां डाल… तीन उंगलियां…”
लक्ष्मी ने तीन उंगलियां प्रिया की चूत में ठूंस दीं। तेज-तेज धक्के देने लगी। अंगूठा क्लिट पर दबाते हुए। प्रिया की कमर हवा में उछल रही थी।
“हां… ऐसे ही… गहरी… मेरी चूत फाड़ दो लक्ष्मी… आंटी की चूत को अपना बना लो…”
लक्ष्मी ने प्रिया को पीछे लिटा दिया। उसकी मोटी-मोटी जांघें चौड़ी करके फैला दीं। साड़ी अब सिर्फ कमर पर लिपटी हुई थी। लक्ष्मी ने मुंह नीचे किया और प्रिया की सूजी हुई, रस से चमकती चूत पर जीभ फेर दी।
“आह्ह्ह्ह!!! लक्ष्मी… क्या कर रही हो…” प्रिया चीख पड़ी।
लक्ष्मी ने पूरी जीभ से चूत चाटनी शुरू कर दी। ऊपर से नीचे तक लंबी-लंबी चाट। क्लिट को चूसना, निचोड़ना। दो उंगलियां अंदर घुसाकर G-spot पर दबाना। प्रिया दोनों हाथों से लक्ष्मी के सिर को पकड़े हुए थी और अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ रही थी।
“चूसो… अपनी आंटी की चूत चूसो… हां… जीभ अंदर डालो… चाटो… मैं फिर आ रही हूँ… बहुत जोर से!!”
प्रिया का दूसरा ऑर्गेज्म आया। इस बार वह स्क्वर्ट कर गई। गर्म रस की फुहार लक्ष्मी के मुंह, चेहरे, स्तनों पर पड़ गई। लक्ष्मी ने रस पी लिया, चाट लिया।
प्रिया अभी भी कांप रही थी। लक्ष्मी उसके ऊपर चढ़ गई। “अब मेरी बारी आंटी। मेरी चूत चाटो।”
लक्ष्मी प्रिया के मुंह पर बैठ गई। अपनी भीगी चूत प्रिया के होंठों पर रगड़ने लगी। प्रिया ने शर्माते हुए भी जीभ निकाल दी। लक्ष्मी की क्लिट चाटने लगी।
“हां आंटी… अच्छे से चाटो… जीभ अंदर डालो… मुझे भी झड़वा दो…”
लक्ष्मी ने प्रिया के बाल पकड़कर अपनी चूत जोर से रगड़ी। कुछ ही मिनटों में वह भी जोर से झड़ गई। उसका रस प्रिया के मुंह में भर गया। प्रिया ने उसे पी लिया।
दोनों थोड़ी देर एक-दूसरे से लिपटकर लेटी रहीं। पसीने से तर शरीर, आधी खुली साड़ियां, भारी सांसें।
लक्ष्मी ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, “अब तो मजा आ रहा है ना आंटी? स्कूल वाले बॉयफ्रेंड से भी ज्यादा?”
प्रिया ने शर्माते हुए सिर हिलाया। “हां… लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है ना?”
लक्ष्मी मुस्कुराई। “बहुत कुछ बाकी है आंटी…”
दोनों की गीली चूतें तेजी से रगड़ खा रही थीं। पसीना टपक रहा था। स्तन उछल रहे थे। कमरे में सिर्फ उनकी हांफती सांसें और भीगी चूतों की आवाजें थीं।
लक्ष्मी ने प्रिया के एक स्तन को मुंह में ले लिया और चूसते हुए तेजी से रगड़ने लगी। “आंटी, तुम मेरी हो… हर छुट्टी में तुम्हारी ये प्यास मैं बुझाऊंगी… तुम्हें कभी पति की जरूरत नहीं पड़ेगी…”
प्रिया ने लक्ष्मी की कमर पकड़ ली। “हां… मैं तुम्हारी हूँ… चोदो मुझे… अपनी आंटी को अपनी रंडी बना लो…”
दोनों एक साथ झड़ गईं। उनकी चूतों से रस मिलकर बह निकला। चीखें निकलीं। शरीर कांप उठे।
लेकिन लक्ष्मी अभी रुकने वाली नहीं थी। उसने प्रिया को फिर से पीछे लिटाया, उसकी जांघें कंधों पर रखीं और मुंह लगा दिया। इस बार बहुत तेजी से चाटने लगी। जीभ अंदर-बाहर कर रही थी। क्लिट को चूस रही थी। प्रिया के दोनों स्तनों को हाथों से मसल रही थी।
“लक्ष्मी… मैं थक गई… लेकिन मत रुको… चूसती रहो… मैं फिर आ रही हूँ… हायyyy!!”
प्रिया का चौथा ऑर्गेज्म आया। वह पूरी तरह बेहोश-सी हो गई। शरीर थर-थर कांप रहा था। रस लक्ष्मी के मुंह में भर गया।
लक्ष्मी ने ऊपर आकर प्रिया को गहरी चुम्बन दी। दोनों की जीभें एक-दूसरे में लिपट गईं। रस की स्वाद वाली चुम्बन।
“अब तो तुम पूरी तरह मेरी हो गई हो आंटी,” लक्ष्मी फुसफुसाई।
भाग ४ (अंतिम भाग)
प्रिया ने लक्ष्मी को जोर से खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया। अब उसकी बारी थी। ३५ साल की इस भूखी औरत में अचानक एक नई आग जाग उठी थी।
“अब तू चुप रह लक्ष्मी… आज मैं तुझे दिखाती हूँ कि आंटी भी कैसे चोद सकती है,” प्रिया ने भारी आवाज में कहा। उसकी आंखों में शर्म कम और भूख ज्यादा थी।
उसने लक्ष्मी को पीठ के बल लिटाया। लक्ष्मी की युवा, चुस्त देह पूरी तरह नंगी पड़ी थी। प्रिया ने उसकी जांघें चौड़ी कीं और घुटनों के बल बैठ गई। पहली बार उसने झुककर लक्ष्मी की चूत को चूम लिया।
“आह्ह्ह… आंटी…” लक्ष्मी सिहर उठी।
प्रिया की जीभ अनाड़ी लेकिन बहुत जोशीली थी। वह पूरी चूत चाटने लगी – ऊपर से नीचे तक, क्लिट को चूसती हुई, अंदर जीभ घुसाती हुई। “कितनी मीठी है तेरी चूत… कितना रस है…” वह बड़बड़ाई।
लक्ष्मी ने प्रिया के बाल पकड़ लिए। “हां आंटी… और तेज चाटो… अपनी जीभ अंदर डालो… हां… ऐसे ही… तुम बहुत अच्छी हो…”
प्रिया ने दो उंगलियां लक्ष्मी की चूत में डाल दीं और तेज-तेज धक्के देने लगी। मुंह क्लिट पर लगा रखा था। चूसती, चाटती, उंगलियां अंदर-बाहर। लक्ष्मी की कमर हवा में उछल रही थी।
ये आंटी… पहली बार कर रही है फिर भी मुझे पागल कर रही है… कितनी भूखी है ये औरत, लक्ष्मी के मन में विचार आया।
प्रिया ने लक्ष्मी को भी कुत्ते की मुद्रा में कर दिया। अब लक्ष्मी की पतली कमर और छोटी गोल गांड ऊपर थी। प्रिया ने पीछे से उसकी चूत में तीन उंगलियां ठीक से घुसा दीं।
“लक्ष्मी… तेरी चूत कितनी टाइट है… मुझे चोदने दे…” प्रिया ने कहा और तेजी से उंगलियां चलाने लगी। दूसरा हाथ आगे बढ़ाकर लक्ष्मी के स्तन मसलने लगी।
“आंटी… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… हां… मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज…” लक्ष्मी चीख रही थी।
प्रिया ने अंगूठा लक्ष्मी की गांड में भी घुसाया। दोनों तरफ से उंगलियां चल रही थीं। कमरा उनकी चीखों और भीगी आवाजों से भर गया था।
लक्ष्मी का ऑर्गेज्म बहुत जोरदार आया। वह चीखती हुई आगे गिर पड़ी। उसकी चूत से रस की फुहार निकली।
लेकिन प्रिया रुकी नहीं। उसने लक्ष्मी को करवट दिलाया और खुद उल्टी दिशा में बैठ गई। दोनों की चूतें एक-दूसरे की ओर थीं। फिर प्रिया ने अपनी भारी चूत लक्ष्मी की चूत पर रखकर जोर-जोर से रगड़नी शुरू कर दी।
दोनों की गीली चूतें आपस में रगड़ खा रही थीं। क्लिट क्लिट से टकरा रही थीं। भारी-भरकम स्तन उछल रहे थे। पसीना टपक रहा था।
“आंटी… बहुत तेज… हम दोनों साथ आएंगे…” लक्ष्मी हांफ रही थी।
प्रिया ने लक्ष्मी की कमर पकड़कर और जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। “हां बेटी… मैं आ रही हूँ… तू भी आ… साथ… साथ… हायyyy!!”
दोनों एक साथ चीख पड़ीं। उनके रस मिलकर बह निकले। शरीर कांप उठे। दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़ीं।
काफी देर तक दोनों चुपचाप लिपटी पड़ी रहीं। पसीने से तर शरीर, आधी खुली साड़ियां, भारी सांसें।
प्रिया ने लक्ष्मी के बालों में हाथ फेरा और फुसफुसाया, “तुमने मुझे नई जिंदगी दे दी लक्ष्मी। मैंने कितनी बार मना किया था… लेकिन अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
लक्ष्मी मुस्कुराई और प्रिया के स्तन पर चुम्बन दी। “आंटी, अब हर छुट्टी में मैं आऊंगी। तुम्हारी ये प्यास मैं ही बुझाऊंगी। कोई पति, कोई इज्जत की चिंता नहीं। सिर्फ हम दोनों… और हमारी चूतें।”
प्रिया ने शर्माते हुए कहा, “अगली बार जब आओगी तो मैं तैयार रहूंगी… और भी गंदे तरीके सीख लूंगी।”
लक्ष्मी हंसी, “सीखाऊंगी आंटी… बहुत कुछ। स्कूल बॉयफ्रेंड वाली याद अब हमेशा ताज़ा रहेगी।”
दोनों फिर से एक-दूसरे को चूमने लगीं। धीमी, गहरी चुम्बन। हाथ एक-दूसरे की देह पर घूम रहे थे। बाहर अंधेरा हो चुका था। गांव सो रहा था, लेकिन प्रिया के घर में आग अभी भी सुलग रही थी।
समाप्त
